"हम पहले कभी मिले हैं?"
सुधा ने बच्चो जैसी शरारती मुस्कराहट
के साथ कहा ,"शायद!"
"शायद! कहाँ?" मैंने पूछा।
सुधा बोली "हो सकता है हम किताबों में मिले हों।"
"लोग कॉलेज में, ट्रेन में, फ्लाइट में, बस में , लिफ्ट में , होटल
में, कैफ़े में तमाम जगहों पर मिल सकते हैं लेकिन कोई किताबों में
कैसे मिल सकता है?" मैंने पूछा।
इस बार मेरी बात काटते हुए सुधा बोली
,"दो मिनट के लिए मान लीजिए। हम
किसी ऐसी किताब के किरदार हों जो
अभी लिखी ही नई गई हो
तो?"
ये सुनकर मैंने चाय के कप से एक लंबी
चुस्की ली और कहा " मजाक अच्छा
कर लेती हैं आप !"
~' मुसाफ़िर कैफे'
जारी रहेगी कहानी .......
सुधा ने बच्चो जैसी शरारती मुस्कराहट
के साथ कहा ,"शायद!"
"शायद! कहाँ?" मैंने पूछा।
सुधा बोली "हो सकता है हम किताबों में मिले हों।"
"लोग कॉलेज में, ट्रेन में, फ्लाइट में, बस में , लिफ्ट में , होटल
में, कैफ़े में तमाम जगहों पर मिल सकते हैं लेकिन कोई किताबों में
कैसे मिल सकता है?" मैंने पूछा।
इस बार मेरी बात काटते हुए सुधा बोली
,"दो मिनट के लिए मान लीजिए। हम
किसी ऐसी किताब के किरदार हों जो
अभी लिखी ही नई गई हो
तो?"
ये सुनकर मैंने चाय के कप से एक लंबी
चुस्की ली और कहा " मजाक अच्छा
कर लेती हैं आप !"
~' मुसाफ़िर कैफे'
जारी रहेगी कहानी .......
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