#गावके_झरोखे_से
सवेरे सवेरे महिला निकल ली है खिलहान की ओर सिर पर तिरपाल-बोरी-दउरी लिए। धान सटकाया जायेगा वहाँ।
तिरपाल में इकट्ठा किया जायेगा और अन्न और आधा आधा बांट कर अपना हिस्सा बोरियों में भर क्र घर लौटेगी संझा को।
इससे साल भर के चावल का इंतजाम हो जायेगा
बस इतनी सी थी ये कहानी मेरे छोटे से गांव की आगे भी जारी रहेगी ;
सवेरे सवेरे महिला निकल ली है खिलहान की ओर सिर पर तिरपाल-बोरी-दउरी लिए। धान सटकाया जायेगा वहाँ।
तिरपाल में इकट्ठा किया जायेगा और अन्न और आधा आधा बांट कर अपना हिस्सा बोरियों में भर क्र घर लौटेगी संझा को।
इससे साल भर के चावल का इंतजाम हो जायेगा
बस इतनी सी थी ये कहानी मेरे छोटे से गांव की आगे भी जारी रहेगी ;
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