"तलाक तलाक तलाक "जैसे ही रिया के कानों में पिघले सीसे की तरह बिगड़ैल नबाब साहब के ये शब्द पड़े।दिल मे हूक सी उठी आँखों के आगे अंधेरा छा गया।वो दोनों हाथों से सर पकड़कर धम्म से उस आलीशान सोफे पे गिर पड़ी।आँसुओ के बहते आवेग में उसे पुरानी बातें याद आने लगीं।
बनारस के ब्राह्मण खानदान में बचपन से ही अद्वितीय सुंदर एकलौती बेटी रिया को सबसे ज्यादा प्यार उसके पुजारी पापा करते थे।छोटी थी तो कंधे पे बिठाकर बनारस की घाटों पर शाम में घूमते हुए लोगों से कहते कि "देखना एक दिन ये मेरा और मेरे कुल का नाम रोशन करेगी”।
उम्र बढ़ी तो सुंदरता और जवानी और निखरी।रिया के तीखे नयन हिरनी सी कमर गोरा और गदराए जिस्म पे एक छोटी मोटी मूवी बनाने वाले डायरेक्टर की नज़र पड़ी तो उसने अपनी मूवी में एक छोटा सा रोल और मॉडलिंग के लिए आफर दे दिया और रिया ने भी हीरोइन बनने का सपने संजो रखे थे।
मॉडलिंग और मूवी में रिया के काम करने को लेकर घर पे खूब कोहराम मचा ,रोना धोना जम के हुआ आखिर में रिया के जिद की जीत हुई।ग्लैमर और पैसे का लालच बुद्धि और इज़्ज़त पे भारी पड़ गया और रिया अपने परिवार के अरमानों को रौंदते हुए मुम्बई चल दी अपने सपनों को पूरा करने।
कुछ दिनों तक मुम्बई के एक परिचित रिश्तेदार के यहाँ रहकर एक्टिंग की ट्रेनिंग लेते हुए मॉडलिंग की फिर उसने वो छोटा रोल बखूबी निभाया लेकिन ग्लैमर की दुनिया का काला सच यह भी है कि इस दुनिया में सफलता पाने के लिए टैलेंट के अलावा या तो कोई गॉडफादर चाहिए या फिर इज़्ज़त का सौदा करना पड़ता है।
जब बहुत स्ट्रगल करने के बाद भी काम न मिला तो आखिर में रिया को कॉम्प्रमाइज़ करना पड़ा।अपनी सुंदरता और शरीर का इस्तेमाल कर वह काम पाने में कामयाब हुई और बहुत तेजी और आसानी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगी।
यही उसकी मुलाकात एक खानदानी बहुत पैसे वाले पैतालीस वर्षीय बिगडैल नवाब से हुई जो अपने ब्लैक मनी को फिल्मों में फाइनेंस करता था।अब रिया के लिए नैतिकता और पिता की सिखाई अच्छी बातों का कोई मोल न था शराब ड्रग्स जिस्मफरोशी सब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके थे।परिवारवालो के संबंध
रिया से लगभग ख़त्म हो चुके थे।
अंत में रिया उस मोटे पैसे वाले नवाब को अपने हुस्न के जाल में फसाने में कामयाब हो गयी।नवाब ने भी पहली बीवी को तलाक देकर बहुत शानो शौकत के साथ रिया से निकाह किया इस निकाह में शहर बड़े बड़े लोगों ने शिरकत की।खूब शानदार दावत और मेहमाननवाज़ी हुई ,पत्रकार मीडिया सब ने इस शाही शादी के सम्मान में कसीदे पढ़े।लजीज वयंजनो की महक वऔर लाइटो से पूरा महल जगमगा उठा,पर दूर बनारस में पंडितजी ने शर्मिदगी सेे घर में घनघोर अंधेरा कर रखा था।रिया के परिवार से कोई उस शादी में न गया था।पर रिया को इस बात का कोई मलाल न था।वो नकली ग्लैमर सफलता और पैसे के नशे में चूर थी।उसे अपनों का प्यार याद न था।उधर लोग खूब खुश होकर जमकर मिठाइयाँ और लजीज खाने का आंनद ले रहे थे इधर बनारस में दुल्हन के घर खाना ना बना था।उधर नाच ,गाना संगीतऔर मस्ती थी इधर करुण रुदन और दर्द।
दो सालों तक नवाब थोड़ा रिया के प्रेम में पागल रहा फिर उसकी पहले की तरह आय्याशियाँ शुरु हो गईं।जब रिया को नवाब की किसी और उभरती मॉडल से निकाह की खबर सुनी तो वह गुस्से से पैर पटकती हुई नवाब से बात करने गयी तो उसे "तलाक तलाक तलाक 'शब्द सुनने को मिले।जिस पैसे शानों शौकत और रुतबे के लिए उसने नवाब से शादी की थी वो उसके हाथ से फिसलती नज़र आई।
नवाब चिल्ला रहा था "जा बदचलन लड़की तलाक के बाद अब तेरी इस महल में कोई जगह नही।"रिया नीचे जाने के बजाए महल के छत पर गयी।उसे पापा के साथ बनारस में कंधे पर घूमना और परिवार का प्यार याद आ रहा था।'पापा मैं आपका नाम रोशन न कर सकी माफ कीजियेगा" बुदबुदाते हुए छत से कूद गई।
अगले दिन समाचार पत्रों में रिया की छत से पैर फिसलने से गिरकर मौत की खबर छपी थी ।अफसोस उस बदनसीब लड़की की मौत पे रोने वाला कोई न था इधर नवाब साहब फिर से नए निकाह के लिए तैयारी में
जुट गए....
बनारस के ब्राह्मण खानदान में बचपन से ही अद्वितीय सुंदर एकलौती बेटी रिया को सबसे ज्यादा प्यार उसके पुजारी पापा करते थे।छोटी थी तो कंधे पे बिठाकर बनारस की घाटों पर शाम में घूमते हुए लोगों से कहते कि "देखना एक दिन ये मेरा और मेरे कुल का नाम रोशन करेगी”।
उम्र बढ़ी तो सुंदरता और जवानी और निखरी।रिया के तीखे नयन हिरनी सी कमर गोरा और गदराए जिस्म पे एक छोटी मोटी मूवी बनाने वाले डायरेक्टर की नज़र पड़ी तो उसने अपनी मूवी में एक छोटा सा रोल और मॉडलिंग के लिए आफर दे दिया और रिया ने भी हीरोइन बनने का सपने संजो रखे थे।
मॉडलिंग और मूवी में रिया के काम करने को लेकर घर पे खूब कोहराम मचा ,रोना धोना जम के हुआ आखिर में रिया के जिद की जीत हुई।ग्लैमर और पैसे का लालच बुद्धि और इज़्ज़त पे भारी पड़ गया और रिया अपने परिवार के अरमानों को रौंदते हुए मुम्बई चल दी अपने सपनों को पूरा करने।
कुछ दिनों तक मुम्बई के एक परिचित रिश्तेदार के यहाँ रहकर एक्टिंग की ट्रेनिंग लेते हुए मॉडलिंग की फिर उसने वो छोटा रोल बखूबी निभाया लेकिन ग्लैमर की दुनिया का काला सच यह भी है कि इस दुनिया में सफलता पाने के लिए टैलेंट के अलावा या तो कोई गॉडफादर चाहिए या फिर इज़्ज़त का सौदा करना पड़ता है।
जब बहुत स्ट्रगल करने के बाद भी काम न मिला तो आखिर में रिया को कॉम्प्रमाइज़ करना पड़ा।अपनी सुंदरता और शरीर का इस्तेमाल कर वह काम पाने में कामयाब हुई और बहुत तेजी और आसानी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ने लगी।
यही उसकी मुलाकात एक खानदानी बहुत पैसे वाले पैतालीस वर्षीय बिगडैल नवाब से हुई जो अपने ब्लैक मनी को फिल्मों में फाइनेंस करता था।अब रिया के लिए नैतिकता और पिता की सिखाई अच्छी बातों का कोई मोल न था शराब ड्रग्स जिस्मफरोशी सब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुके थे।परिवारवालो के संबंध
रिया से लगभग ख़त्म हो चुके थे।
अंत में रिया उस मोटे पैसे वाले नवाब को अपने हुस्न के जाल में फसाने में कामयाब हो गयी।नवाब ने भी पहली बीवी को तलाक देकर बहुत शानो शौकत के साथ रिया से निकाह किया इस निकाह में शहर बड़े बड़े लोगों ने शिरकत की।खूब शानदार दावत और मेहमाननवाज़ी हुई ,पत्रकार मीडिया सब ने इस शाही शादी के सम्मान में कसीदे पढ़े।लजीज वयंजनो की महक वऔर लाइटो से पूरा महल जगमगा उठा,पर दूर बनारस में पंडितजी ने शर्मिदगी सेे घर में घनघोर अंधेरा कर रखा था।रिया के परिवार से कोई उस शादी में न गया था।पर रिया को इस बात का कोई मलाल न था।वो नकली ग्लैमर सफलता और पैसे के नशे में चूर थी।उसे अपनों का प्यार याद न था।उधर लोग खूब खुश होकर जमकर मिठाइयाँ और लजीज खाने का आंनद ले रहे थे इधर बनारस में दुल्हन के घर खाना ना बना था।उधर नाच ,गाना संगीतऔर मस्ती थी इधर करुण रुदन और दर्द।
दो सालों तक नवाब थोड़ा रिया के प्रेम में पागल रहा फिर उसकी पहले की तरह आय्याशियाँ शुरु हो गईं।जब रिया को नवाब की किसी और उभरती मॉडल से निकाह की खबर सुनी तो वह गुस्से से पैर पटकती हुई नवाब से बात करने गयी तो उसे "तलाक तलाक तलाक 'शब्द सुनने को मिले।जिस पैसे शानों शौकत और रुतबे के लिए उसने नवाब से शादी की थी वो उसके हाथ से फिसलती नज़र आई।
नवाब चिल्ला रहा था "जा बदचलन लड़की तलाक के बाद अब तेरी इस महल में कोई जगह नही।"रिया नीचे जाने के बजाए महल के छत पर गयी।उसे पापा के साथ बनारस में कंधे पर घूमना और परिवार का प्यार याद आ रहा था।'पापा मैं आपका नाम रोशन न कर सकी माफ कीजियेगा" बुदबुदाते हुए छत से कूद गई।
अगले दिन समाचार पत्रों में रिया की छत से पैर फिसलने से गिरकर मौत की खबर छपी थी ।अफसोस उस बदनसीब लड़की की मौत पे रोने वाला कोई न था इधर नवाब साहब फिर से नए निकाह के लिए तैयारी में
जुट गए....
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