मंगलवार, 21 नवंबर 2017

रानी पद्मिनी पर बुद्धिजीवियों से कुछ सवाल

ये विषय महज एक फिल्म तक सीमित नहीं है . ये विषय एक मौक़ा है इतिहास से उन पलों को खोज निकालने का जो आगे भविष्य में कई स्थानों पर उठ कर फिर खड़े हो सकते हैं . कश्मीर और पाकिस्तान जैसी तमाम जगहों पर तो खड़े भी हो चुके हैं . अब समय है इसी मौके पर ये भी जान लेने का कि दुर्दांत आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी के आने पर जो चित्तौड़ में हुआ वो अब तक किसी अन्य नरेश और सम्राट आदि के आने पर क्यों नहीं हुआ था ?
युद्ध और शांति आदि इतिहास में दोनों साथ साथ चले हैं . अक्सर एक नरेश दूसरे नरेश को हरा कर उसके राज्य को अपनी सीमाओं में मिला लिया करता था लेकिन जो वीभत्स रूप क्रूर आक्रांता के कारण चित्तौड़ का हुआ वो संसार में अद्वितीय क्यों है ? अलाउद्दीन खिलज़ी को वो शिक्षा किस ने दी या कहाँ से मिली थी जो ना सिर्फ महारानी पद्मावती अपितु उनके राज्य की हर नारी ने खुद को आग में स्वाहा कर लिया…
यकीनन ये ऐसा सवाल है जो इतिहास को तोड़ कर लिखने वालों के साथ टी वी पर बैठ कर लच्छेदार बातें करने वालो के हर रसीले जवाब को एक पल में ध्वस्त कर देता है . जौहर का अर्थ होता है खुद को स्वाहा कर देना और ये किसी भी स्वाभिमानी नारी का अंतिम चरण होता है . संसार जानना चाहता है क्रूरता की उस अंतिम पराकाष्टा और नीचता के उस अंतिम बिंदु को जो अलाउद्दीन ही नहीं तमाम आक्रन्ता ले कर साथ आये थे और जिसके शिकार हिन्दू हुए हैं कई हजार सालों से और जो अब तक जारी है अनवरत उसी हालत में . कितने मज़हबी ठेकेदारों में ये दम है जो अलाउद्दीन के आक्रमण के पीछे छिपी उस सोच को खुल कर चैनल पर आ कर बता सकते हैं जो ना सिर्फ रानी पद्मावती अपितु उस राज्य की हर नारी को खुद को स्वाहा करने के लिए आतुर कर देता है ..
संसार आतंक के उस अंतिम स्तर की सोच को इसी समय जानना चाहता है . यकीनन सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का विरोध , डी जी वंजारा का विरोध आदि करने वालों के मुँह से कभी भी अलाउद्दीन का विरोध न सुनने के बाद ये जरूर जाहिर होता है कि कई अभी भी उस जल्लाद की विचारधारा से सहमत होंगे और उनकी ये सहमति कब कोई नया अलाउद्दीन बना कर ला देगी ये कहा नहीं जा सकता .. इन नए अलाउद्दीन के आगे अब हिन्दू समाज कोई नई पद्मवती स्वाहा करने के लिए कतई तैयार नहीं है इसलिए अब समय है कि समाज में छिपे उन सभी अलाउद्दीन की पहिचान हो जाए क्योकि बेटी बचाओ अभियान के तहत ये कार्य सबसे ज्यादा जरूरी होता है . बेटियों को गर्भ में मार देने वाले तमाम डॉक्टर यकीनन घृणा के पात्र हैं जो जेलों में चक्की पीस रहे हैं पर बेटियों , माताओ और बहनो को जिन्दा जल जाने पर मजबूर कर देने वाले जल्लाद को किताबों में पढ़ाया जाना और उसके कई समर्थक होना इस देश का दुर्भाग्य क्यों न माना जाय 

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